Saturday, September 22, 2007

कुछ कदम पीछे कि ओर


why i started this blog .i m of the genre which finds oneself more comfortable with कागज़ और कलम
a pen between fingers and the rustling of papers set the mind functioning and heart racing .but i also acknowledge the advantages of developing technology . sharing my thoughts and emotions with my friends by letters and on telephone was becoming increasingly difficult and inadequate . hence this blog . moreover i feel that people of my age and type start longing for communicating with the persons of their own age group . well the search has begun. let us see how many of us can find one another . i invite all u youngsters who chance to stumble upon this blog and have any memory of places or person talked about herein to express their views . i also request them share this with their parents and encourage them to join us in our this journey towards past .

my childhood memories start from babupurwa colony ,kidwainagar kanpur .उस समय किद्वैनगर चौराहे पर .एक पानी का फौन्तैन था और उसमे बाकायदा पानी चलता था । अँधेरा होने के बाद रंगबिरंगी lights के बीच girti पानी की इन्द्रधनुषी धाराएँ हमे kisi tilism से कम नही लगती थी । सच पूछो तो हमारा sansar बहुत सादा हुआ करता था । छोटी छोटी बातों में ढ़ेर सारी खुशियों वाला .और चौराहे प्र कॉलोनी कि तरफ वह वीराट पीपल का पेड़ जो जिसके हवा मे ताली बजाते पत्ते आज भी मेरी चेतना पर छा जाते है .
उस चौराहे के पास कॉलोनी के quarters के आगे बहुत बड़ा मैदान थापता नही अब क्या हाल है पर उस समय उस मैदान में दशहरा का मेला लगता था ,रावन भी जलता था . हम लोग नीरा दीदी के घर से आंगन में तखत के ऊपर कुर्सियाँ रख कर दीवार से लटक कर रावन का जलना देखते थे । u wont believe kisi भी multiplex कि बालकनी से देखने में हमे वह आनंद कभी नही आया .शायद वह उम्र ही ऐसी होती है ki उल्लास bina कारण छलकता है।
उस उम्र की एक और याद है जो हमे बहुत खूबसूरत लगाती है । अपने बाबू के साथ naharia के कच्चे रास्ते पनकी के mandir जाना । बाबू हमे और गीता jijji को cycle में बाबुपुरवा से पनकी तक ले जाते थे । आज की सड़के और traffic को देखते हुये तो यह असम्भव सा लगता है ना .पर उस समय naharia का कच्चा रास्ता बहुत हरा भरा होता था । पानी से भरी naharia में सफ़ेद kamalini के फूल khile रहते थे .naharia के kinare हरी मुलायम घास की चौड़ी पट्टी ,उसके बाद ऊँचे हरे पेड़ ,jinaki छाया घास पर दूर तक पसरी रहती थी । naharia के kinare कच्ची पगडंडी पर हमारे बाबू की cycle चलती थी । बीच में बाबू cycle kinare खड़ी करते और पानी में उतर हमारे लीये kamalini तोड़ते । हम और jijji kinare से उचक उचक कर उन्हें बताते की हमे कौन से फूल चाहिए .कमिलिनी की लंबी डंडी को बीच से थोड़ा थोड़ा तोड़ कर माला बनायीं जाती थी ,जीसमे नीचे कमिलिनी के फूल का locket रहता था .उस हरी भरी naharia का तो अब शायद कोई अस्तित्व ही नही है।
वह naharia रास्ते में कहॉ से शुरू होती थी और कहॉ ख़त्म यह तो हमे bilkul याद नहीं पड़ता पर उसकी haritima आज भी मेरे मन पर छाई है .शायद यह उस चौराहे पर के पीपल और naharia का ही मेरे अचेतन मन पर असर है ki nature se meri एक खास तहर ki अंतरंगता है .यहाँ तक ki when i close my eyes its never absolute black its green .i always dream of green hills and vast expanse of blue sky .in fact एक टुकड़ा आस्मान और एक मुट्ठी हरियाली हमेशा मेरे साथ रहती है ,बंद चाहर्दीरी में भी .
kuchh kadam peeche kii or .this journey to past becomes more fulfilling when your future is accompanying u .yes i am experiencing it .the peepal tree here is clicked by my fifteen year old son especially for this post.

5 comments:

who cares... said...

absolutely true....today...i feel 'something' is missing in people's lives....greatest pleasures of life are in simplest things....we are rushing towards material...without knowing that ....we cannot truly posses anything...thanx for reminding the FUNDAMENTALS of life...

shubham said...

made me dream of things i have never seen....but i sure could feel the naharia gushing beside me....how different were those times...the innocence of childhood that existed in those days has vanished now....the calm of those days is nowhere to be seen now...

abhishek said...

hi Namita, i really njoyed ur blogpot creativity.....
i went nostalgic and really want 2 get more of it.
d best 1 is " REHAT WALE BHAIYA "
WELL...
abhi ye main shekhoo ke ID se bhej rahi hoon
well my yahoo ID is: pushpasonwani@yahoo.com

abhishek said...

sorry its: pushpasonwani@yahoo.co.in

abhishek said...

plz give ur google/yahoo ID so that v can hav a nice chat.....
sorry auntie. i know that blogspot is not maent 4 these comments but i had none of ur IDs
so plz give mail it.......
goodbye